देव सूर्य मंदिर में अक्षय नवमी के अवसर परउमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, महिलाओं ने किया आवला वृक्ष का पूजन

Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक सूर्य मंदिर जो देव में स्थित है आज अक्षय नवमी के अवसर पर काफी भीड़ भाड़ देखी गई सुबह से शाम तक लगभग हजारों भक्तों ने दर्शन और पूजन किया आज रविवार को अक्षय नवमी होने के कारण देव के सड़कों पर पूरे दिन वाहनों की भीड़ दिखी और साथ ही मंदिर में भी भक्तों की भीड़ देखी गई.

महिलाओं ने किया आवला वृक्ष का पूजन

मान्यताओं के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु के लिए आंवले के पेड़ का पूजन होता है माना जाता है किइस बीच भगवान विष्णु अवल के पेड़ पर विराजमान होते हैं, इन दोनोंअवल के पेड़ का पूजन और दायां पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

माना जाता है कि अवल के पेड़ का पूजन करने से और साथउसे परिक्रमा करने से सभी मानव कामनाएं पूर्ण होती हैपूजा अर्चना के बाद प्रसाद के रूप में पूरी खीर, सब्जी और मिठाई का भोग लगाया जाता है और साथ ही ब्राह्मण को इस ब्रिज के नीचे ब्रह्म भोज भी करवाया जाता है। 

Surya Dev Mandir Aurangabad: देव सूर्य मंदिर औरंगाबाद का इतिहास

देव सूर्य मंदिर बिहार के औरगांबाद जिले में स्तिथ है, यह मंदिर में भगवन सुया की पूजा की जाती है, इस मंदिर का दरवाजा पूरब दिशा में न होकर पछिम की तरफ है, यह सूर्य मंदिर छठ पूजा के लिए प्रसिद्ध है, देव सूर्य मंदिर से १ किलोमीटर की दुरी पर देव तालाब स्थित है जिसमे श्रद्धालु छठ का अरग देते है.

देव सूर्य मंदिर किसने बनवाया ?

लोक कथाओ के अनुसार यह मंदिर कृष्ण के पुत्र साम्ब के दुवारा बनाया गया था, कहा जाता है की देव और असुर के बिच हुवे युद्ध में देवता असुरो से हर गए थे तब देव माता अदिति ने शक्तिशाली पुत्र की प्राप्ति के लिया छठी मैया का व्रत किया था, तब छाती मैया खुश होकर तेजस्वी पुत्र प्राप्त होने का वरदान दी थी, तब देव माता अदिति की पुत्र की प्राप्ति हुई थी जिसने असुरो से युद्ध करके देवताओ को विजय दिलाई थी. तब से यहाँ पर छठ पूजा होना शुरू हो गया था. यह मंदिर छठी सातवीं सताब्दी की होने का अनुमान लगाया जाता है. अन्य मानयतयओ के अनुसार यह मंदिर त्रेता युग का भी बताया जाता है साथ ही इस मंदिर को देवार्क के तीन सूर्य मदिरो में से एक इसे भी मन जाता है

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